class 11th physics notes in hindi – chapter 3 motion in a straight line

               अध्याय 3 सरल रेखा में गति   

 भौतिक विज्ञानं कक्षा – 11 पाठ 3 : सरल रेखा में गति     

        chapter-3 motion in a straight line

 

 गति (Motion): समय के साथ साथ जब कोई वस्तु अपने परिवेश के सापेक्ष अपनी स्थिति में परिवर्तन करती है तो वह वस्तु गतिशील कहलाती है।

विराम अवस्था (Rest): समय के साथ साथ जब कोई वस्तु अपने परिवेश के सापेक्ष अपनी स्थिति में परिवर्तन नहीं करती है तो वह वस्तु विराम अवस्था में होती है।

निर्देश तंत्र (frame of reference)

किसी कण की स्थिति को दर्शाने के लिए हमें एक निर्देश तंत्र की आवश्यकता होती है।

इसके लिए एक समकोणिक निर्देशांक-निकाय जिसमें तीन परस्पर लम्बवत अक्ष होते हैं जिन्हें x, y- तथा z-अक्ष कहते हैं। समय नापने के लिए इस निकाय में एक घड़ी रख देते हैं। घड़ी सहित इस निर्देशांक-निकाय को निर्देश तंत्र (frame of reference) कहते हैं।

जब किसी वस्तु के एक या अधिक निर्देशांक समय के साथ परिवर्तित होते हैं तो वस्तु को गतिमान कहते हैं। अन्यथा वस्तु को उस निर्देश तंत्र के सापेक्ष विरामावस्था में मानते हैं।

विरामावस्था (rest) और गति (motion), सापेक्ष अवस्थायें हैं

एक वस्तु, एक ही समय में , गति और विराम दोनों अवस्थाओं में हो सकती है। उदाहरण के लिये , गतिशील ट्रेन में बैठा एक व्यक्ति उसी ट्रेन में बैठे दूसरे व्यक्ति के सापेक्ष विरामावस्था में है परन्तु पृथ्वी पर खड़े व्यक्ति के सापेक्ष वह गतिशील है।

यांत्रिकी (Mechanics)

वस्तुओं की निम्न वेगों पर व्यवस्थित गति के अध्ययन से सम्बन्धित भौतिकी की शाखा को यांत्रिकी ( Mechanics) कहते हैं। यांत्रिकी को निम्नलिखित तीन शाखाओं में वर्गीकृत कर सकते हैं –

(1) स्थैतिकी (Statics)- इस शाखा के अन्तर्गत विरामावस्था में स्थित वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है।

 

(2) शुद्ध गति विज्ञान (kinematics)- में वस्तुओं की केवल गति का अध्ययन करते हैं, गति के कारणों का नहीं।

 

(3) गति विज्ञान (dynamics) -में वस्तुओं की गति के साथ-साथ गति के कारणों का भी अध्ययन करते हैं।

 

गति के प्रकार (Types of Motion)

  1. एक-विमीय गति (One Dimensional Motion)
  2. द्वि-विमीय गति (Two Dimensional Motion)
  3. त्रि-विमीय गति (Three Dimensional Motion)

(1) एक-विमीय गति (One Dimensional Motion)- यदि समय के साथ केवल एक निर्देशांक परिवर्तित होता है तो गति एक-विमीय गति (1 – D) या सरल रेखीय गति कहलाती है। जैसे- ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकी गयी वस्तु की गति, एक सीधी पटरी पर रेलगाड़ी की गति, सिलाई मशीन की सुई की गति।

(2) द्वि-विमीय गति (Two Dimensional Motion)- यदि समय के साथ केवल दो निर्देशांक परिवर्तित होते है , तो गति द्वि-विमीय ( 2 – D) या समतल में गति कहलाती है। जैसे – कैरम बोर्ड पर गोटी ( carom coin) की गति, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमण गति, , मैदान में क्रिकेट खेलते खिलाड़ी की गति।

(3) त्रि-विमीय गति (Three Dimensional Motion)- यदि समय के साथ तीनों निर्देशांक परिवर्तित होते है, तो गति त्रि-विमीय (3 – D) या आकाश में गति कहलाती है। आसमान में उड़ते पक्षी की गति, हवाई जहाज की गति।

गति के अन्य प्रकार

  1. स्थानान्तरीय (translatory)
  2. घूर्णी (rotatory)
  3. दोलनी (oscillatory)

 स्थानान्तरीय गति (Translatory Motion) – स्थानान्तरीय गति एक सरल रेखा या वक्र-पथ (curved path) के अनुदिश हो सकती है। जैसे- किसी सिथर वस्तु के सापेक्ष एक कार की गति।

घूर्णन गति (Rotational Motion)- जब कोई दृढ़ पिण्ड किसी स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन करता है तब पिण्ड की गति घूर्णन गति कहलाती है। जैसे-छत के पंखे की गति।

 दोलन या कम्पन गति (Oscillatory or Vibrational Motion)- जब कोई कण अपनी माध्य स्थिति के इर्दगिर्द अपनी गति को निश्चित समयान्तराल में दोहराता है तब कण की गति दोलन या कम्पन गति कहलाती है। जैसे दीवार घड़ी के लोलक की गति, स्प्रिंग से जुड़े द्रव्यमान की गति आदि।

 

अदिश सदिश राशियाँ (Scalar and Vector Quantities)

अदिश राशियाँ ( Scalar Quantities)- वे भौतिक राशियाँ जिन्हें व्यक्त करने के लिए केवल परिमाण की आवश्यकता होती है, दिशा की नहीं, अदिश कहलाती है। उदाहरण : दूरी , द्रव्यमान, समय, चाल, घनत्व, आयतन, तापमान, विद्युत धारा आदि।

 सदिश राशियाँ (Vector Quantities)- वे भौतिक राशियाँ जिन्हें पूर्णतया व्यक्त करने के लिए परिमाण के साथ एक निश्चित दिशा की भी आवश्यकता होती है , सदिश राशि कहलाती हैं। उदाहरण : विस्थापन , वेग, त्वरण, बल इत्यादि।

 

सदिश राशि का निरूपण (Representation of Vectors): सदिश को एक सरल रेखा के सिरे पर तीर का निशान लगाकर निरूपित करते हैं। इसकी लम्बाई उसके परिमाण के समानुपाती होती है।

दुरी  और विस्थापन (Distance and Displacement)

 दुरी  (Distance):

किसी पिंड द्वारा निश्चित समय में तय किए गए पथ की लम्बाई को दूरी कहते हैं।

  • यह अदिश राशि है।
  • दूरी को ओडोमीटर द्वारा मापा जाता है।
  • दूरी का मात्रक: मीटर (SI) तथा cm (CGS)।
  • विमीय सूत्र : [M°L’T]
  • दूरी कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती।

 

विस्थापन (Displacement)-

किसी पिंड की प्रारम्भिक (initial) तथा अन्तिम (final) स्थितियों के बीच की दिशात्मक दूरी को कण का विस्थापन कहते हैं।

  • यह सदिश राशि है।
  • विस्थापन का मात्रक: मीटर (SI) तथा cm (CGS)|
  • विस्थापन धनात्मक, शून्य या ऋणात्मक हो सकता है।
  • विमीय सूत्र : [M°L’T°] • दो निश्चित बिन्दुओं के मध्य अनन्त दरियाँ सम्भव होती है क्योंकि दो निश्चित बिन्दओं के मध्य अनन्त पथ

सम्भव है। दो दिये गये बिन्दुओं के मध्य विस्थापन का केवल एक मान सम्भव है।

  • यदि कोई वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश बिना दिशा बदले गति करती है तो –

दूरी = |विस्थापन। = विस्थापन का परिमाण

अन्यथा दूरी > विस्थापन।

 

 

बिंदु वस्तु  (Point Objects):

यदि कोई वस्तु अपने आमाप की तुलना में बहुत अधिक दूरी तय करती है तो वह वस्तु बिन्दु वस्तु कहलाती है। जैसे: जब कोई कार कुछ किलोमीटर की दूरी तय करती है तो उसे बिन्दु वस्तु माना जा सकता है। इसी तरह, जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है तो उसे भी बिन्दु वस्तु माना जा सकता है।

चाल वेग (Speed and Velocity)

 चाल :- इकाई समय में तय की गई दूरी को चाल कहते हैं।

अथवा समय के साथ दूरी में परिवर्तन की दर को चाल कहते हैं।

चाल = दुरी  / समय

  • मात्रक = मीटर/सेकण्ड (S.I.), सेमी/सेकण्ड (C.G.S.)
  • विमा = [M° L T]
  •  चाल एक अदिश राशि है।

नोट :- गतिमान कण के लिये चाल कभी शून्य अथवा ऋणात्मक नहीं हो सकती है सदैव धनात्मक होती है। |

 

चाल के प्रकार (Types of Speed)

एकसमान चाल (Uniform Speed or Constant Speed) : जब कोई गतिमान पिंड समान समयान्तराल में समान दूरी तय करता है तो उसकी चाल एकसमान चाल कहलाती है।

असमान चाल या परिवर्ती चाल (Variable Speed): यदि कोई गतिमान कण समान समयान्तरालों में असमान दुरियाँ तय करता है तो उसकी चाल असमान या परिवर्ती चाल कहलाती है।

औसत चाल (माध्य चाल) (Average speed) : वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी और उसमें लगे कुल समय के अनुपात को औसत चाल कहते हैं।

 

औसत चाल = तय की गयी कुल दूरी / दुरी तय करने में लगा समय

तात्क्षणिक चाल (Instantaneous speed)

समय के विशेष क्षण पर कण की चाल तात्क्षणिक चाल कहलाती है।

वाहनों के स्पीडोमीटर तात्क्षणिक चाल मापते हैं।

औसत चाल को किसी समयान्तराल के लिये परिभाषित किया जाता है , जबकि तात्कालिक चाल को किसी एक क्षण के लिये परिभाषित किया जाता है।

 . वेग (Velocity):

समय के सापेक्ष विस्थापन में परिवर्तन की दर वेग कहलाती है।

  • वेग एक सदिश राशि है।
  • विमा : [M° LT’]
  • मात्रक : मीटर / सैकण्ड (S.I.), सेमी / सेकण्ड (C.G.S.)
  • वेग धनात्मक, ऋणात्मक तथा शून्य हो सकता है।
  • वेग की दिशा सदैव विस्थापन की दिशा में होती है।

वेग के प्रकार (Types of Velocity)

 एकसमान वेग (Uniform Velocity) – जब कण के वेग को परिमाण तथा दिशा दोनों समय के साथ परिवर्तित ना हो तो उसका वेग एकसमान वेग कहलाता है। ऐसा केवल तभी सम्भव है जब कण एक सरल रेखा में बिना दिशा परिवर्तित किये गति करे।

असमान या परिवर्ती वेग (Non-Uniform Velocity) – जब वेग का परिमाण अथवा दिशा या दोनों समय के साथ परिवर्ती हो तो कण का वेग असमान वेग या परिवर्ती वेग कहलाता है।

औसत वेग (Average velocity): गतिमान कण द्वारा तय किये गये कुल विस्थापन और उसमें लगे कुल समय के अनुपात को औसत वेग कहते हैं।

औसत वेग= कुल विस्थापन/ कुल समय

     

तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity): समय के विशेष क्षण पर कण का वेग उसका तात्क्षणिक वेग कहलाता है।

 

 

 

 

NOTE:

  1. यदि कोई पिण्ड नियत वेग से गति कर रहा है , तो औसत वेग तथा तात्कालिक वेग बराबर होते हैं। वेग धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती है, क्योंकि यह एक सदिश है, परन्तु चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती, क्योंकि यह वेग का परिमाण है।
  2. किसी गतिशील पिण्ड के औसत वेग की दिशा हमेशा विस्थापन के अनुदिश होती है लेकिन तात्क्षणिक वेग की दिशा हमेशा पथ के स्पर्श रेखीय होती है।
  3. यदि कोई वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश बिना दिशा बदले गति करती है तो औसत वेग का परिमाण औसत चाल के बराबर होता है, अन्यथा, औसत |< औसत ।
  4. यदि कोई पिण्ड नियत चाल से गतिमान है तो उसका वेग नियत ( constant) हो भी सकता है और नहीं भी। एकसमान वृत्तीय गति में, यद्यपि चाल नियत रहती है किन्तु दिशा बदलते रहने के कारण प्रति क्षण वेग बदल जाता है।
  5. किसी पिण्ड के लिये, गति के दौरान किसी क्षण पर , विस्थापन शून्य तथा वेग परिमित ( finite) हो सकते हैं

(जैसे–किसी सरल आवर्त गति के साम्यावस्था में)। साथ ही, किसी पिण्ड के लिये, गति के दौरान किसी क्षण पर, विस्थापन परिमित तथा वेग शून्य हो सकता है।

त्वरण (Acceleration):

 इकाई समय में वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। अथवा किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं।

  • यह एक सदिश राशि है।
  • विमा : [M°L’T’]
  • मात्रक : m/s [SI पति] , cm/s’ [CGS पति

 

त्वरण के प्रकार (Types of Acceleration)

एकसमान त्वरण (Uniform Acceleration):

जब त्वरण का परिमाण तथा दिशा दोनों नियत रहते हैं तो ऐसे त्वरण को एकसमान त्वरण कहते हैं।

 

असमान त्वरण (Non-uniform Acceleration /Variable Acceleration):

जब त्वरण का परिमाण अथवा दिशा अथवा दोनों किसी अन्य भौतिक राशि के सापेक्ष परिवर्ति हो तो इसे परिवर्ती या असमान त्वरण कहते हैं।

 

औसत त्वरण (Average Acceleration) :

औसत त्वरण कुल वेग में परिवर्तन तथा कुल समय का अनुपात होता है।

औसत त्वरण = कुल वेग में परिवर्तन औसत त्वरण / कुल समय अन्तराल

तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous Acceleration):

समय के विशेष क्षण पर कण का त्वरण तात्क्षणिक त्वरण कहलाता है।

त्वरण एक सदिश राशि है, यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

(i) यदि वस्तु सरल रेखा के अनुदिश समान वेग से गति करती है तो त्वरण शून्य होगा।

(ii) यदि एक वस्तु सरल रेखा के अनुदिश बढ़ते हुए वेग से गति करती है। ।तो त्वरण की दिशा गति की दिशा के अनुदिश होती है तथा त्वरण धनात्मक होता है।

(iii) यदि वस्तु सरल रेखा के अनुदिश घटते हुए वेग से गति करती है तो त्वरण की दिशा गति की दिशा के विपरीत होती है तथा त्वरण ऋणात्मक होता है।

Important Points:

  • एक पिण्ड शून्य वेग के होते हुए भी त्वरणयुक्त हो सकता है,

उदाहरण-1 ऊपर की ओर प्रक्षेपित किसी पिण्ड के उच्चतम बिन्दु पर वेग शून्य होता है तथा त्वरण गुरुतवीय त्वरण (g) के बराबर होता है।

उदाहरण-2 सरल आवर्त गति में चरम स्थिति (extreme position) पर।

  • जब कण वक्रीय पथ पर एकसमान चाल से गतिमान हो तो उस पर त्वरण क्रियाशील ( Non-zero) होता हैं।

उदाहरण :- जब कोई पिण्ड एकसमान चाल से वृत्तीय गति करता है तो उसका वेग दिशा बदलते रहने के कारण निरन्तर बदलता रहता है। प्रति एकांक समय में हुए इस प्रकार के वेग परिवर्तन को अभिलम्ब त्वरण (normal acceleration) कहते हैं जिसकी दिशा सदैव वेग की दिशां के लम्बवत् होती है।

  • जब कोई कण परिवर्ती चाल से गतिमान हो तो उस पर आवश्यक रूप से त्वरण क्रियाशील

( Non-zero) होता है।

  • यदि त्वरण नियत है तो त्वरण एकसमान रहता है परन्तु गति असमान होती है और यदि त्वरण नियत नहीं है

तो त्वरण व गति दोनों असमान होते हैं।

  • किसी पिण्ड का वेग परिमाण व दिशा दोनों में परिवर्ती ( varying) होने पर भी उसका त्वरण नियत हो सकता

है। जैसे, प्रक्षेप्य,गति की स्थिति में, वेग को परिमाण व दिशा दोनों बदलते रहते हैं परन्तु त्वरण ‘g नियत रहता हैं।

गति का आलेखीय निरूपण (Graphical Representation of Motion)

 स्थितिसमय आलेख (Position-Time Graph) :

स्थिति समय गतिशील वस्तु की विभिन्न क्षणों पर स्थितिं तथा उसके संगत समय के मध्य खींचा गया आलेख ,  स्थिति समय आलेख कहलाता है।

 

स्थितिसमय आलेख जब कण विराम अवस्था हो :

यदि जब कण विराम अवस्था हो विस्थापन-समय ग्राफ़ समय – अक्ष के समानांतर एक सीधी रेखा होगा जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

स्थितिसमय आलेख जब कण एक समान वेग से गतिमान हो :

समान वेग से गतिमान कण में समान समय अंतराल में समान विस्थापन होता है। इसलिए , समान वेग से गतिमान कण के लिए विस्थापन-समय ग्राफ़ समय-अक्ष पर झुकी एक सीधी रेखा होगा जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

विस्थापनसमय ग्राफ़ से वेग ज्ञात करना :

समान वेग से गतिमान कण के लिए विस्थापन-समय ग्राफ़ समय-अक्ष पर झुकी एक सीधी रेखा होगा जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

ग्राफ पर दो बिन्दुओं क्रमश: A व B के लिए माना वस्तु का समय t, पर विस्थापन S, है तथा समय t, पर विस्थापन S, है।

ग्राफ का ढाल वस्तु के वेग को प्रदर्शित करता है।

महत्वपूर्ण बिन्द :

 

x-अक्ष पर झुकी हुई सरल रेखा ( straight line) यह दर्शाती हैं पिण्ड नियत वेग से गतिमान है।

 

 याद रहे किं x-अक्ष से 90° से अधिक कोण पर झुकी सरल रेखा ऋणात्मक वेग को निरूपित करती है।

वेगसमय ग्राफ (Velocity-Time Graph):

 

(A) यदि कण एकसमान वेग से गतिमान हो तो :

एकसमान वेग से गतिमान कण के लिए यदि हम वेग-समय ग्राफ खींचे तो यह समय-अक्ष के समांतर एक सीधी रेखा होगी, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

(B) यदि कण एक समान त्वरण से गतिमान हो:

एक कण को एकसमान त्वरण से गतिमान कहा जा सकता है यदि इसका वेग समान समय अंतराल में समान रूप से बदलता रहे।

एकसमान त्वरण से गतिमान कण के लिए वेग-समय ग्राफ समय अक्ष पर झुकी एक सरल रेखा होगी , जिसका एक उदाहरण चित्र में दर्शाया गया है।

 वेग समय ग्राफ के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी :

(i) यदि ग्राफ, BC द्वारा दर्शायी गयी, समय-अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा है, तो इसका अर्थ है कि पिण्ड नियत वेग से गतिशील है या त्वरण शून्य (a =0) है। |

(ii) यदि ग्राफ -अक्ष पर झुकी धनात्मक ढाल ( slope) वाली एक सरल रेखा (ग्राफ OA) है तो इसका अर्थ है कि पिण्ड नियत त्वरण (a = स्थिर) से गति कर रहा है।

(iii) यदि ग्राफ x-अक्ष पर झुकी ऋणात्मक ढाल वाली. एक ऋजु रेखा (ग्राफ FG) है तो इसका अर्थ है पिण्ड की गति मन्दन (retardation) के अन्तर्गत है।

(iv) कोई भी वेग-समय ग्राफ समय-अक्ष के लम्बवत् नहीं हो सकता। क्योंकि यह अनन्त त्वरण को प्रकट करता है।

वेगसमय (Velocity-time) ग्राफ के लाभ :

(1) v-t ग्राफ का ढाल:

 (2) वेगसमय ग्राफ समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल

वेग-समय ग्राफ व समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल

अत: वेग-समय ग्राफ व समय अक्ष के बीच घिरा क्षेत्रफल = विस्थापन

 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु का शुद्धगतिकी संबंधी समीकरण :-

 ग्राफ़ीय विधि द्वारा एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के समीकरणों की उत्पत्ति:-

माना एक वस्तु एक सीधी रेखा में एक समान त्वरण व से गतिमान है। इसका प्रारम्भिक वेग ॥ तथा समय । पर वेग ) है। यदि हम इस वस्तु के लिए वेग-समय ग्राफ खीचे तो यह ग्राफ समय अक्ष पर झुकी एक सरल रेखा होगी।

(i) v =utatकी उत्पत्ति :

हम जानते हैं कि त्वरण = v-t ग्राफ का ढाल

आपेक्षिक वेग – 

जब दो वस्तुएँ गतिमान हो , तो उनमे से किसी एक का , दूसरी की अपेक्षा (with respect to the other)  जो वेग होता है , वह आपेक्षिक वेग (relative velocity) कहा जाता है |
मान लिया की A और B दो वस्तुएँ हैं | जब A तथा B के बिच की दुरी में परिवर्तन हो रहा हो तो उनमे प्रत्येक को एक – दूसरी की अपेक्षा वेग होता है | ऐसी स्तिथि में B की अपेक्षा A के आपेक्षिक वेग का अर्थ है B की अपेक्षा A के स्थान परिवर्तन की दर | अर्ताथ B में स्तिथ प्रेक्षक (Observer) द्वारा A के स्थान परिवर्तन की जो दर प्रेक्षित (Observe) की जाती है वही B की अपेक्षा का A आपेक्षिक वेग हुआ |

 

 

 

 

 

 

 

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