class 11 physics notes pdf in hindi – chapter 4 notes motion in a plane in hindi

             अध्याय – 4 – समतल में गति   

               MOTION IN PLANE

 

 अदिश एवं सदिश राशियाँ (Scalar and Vector Quantities)

 भौतिक राशियों को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया है

(i) अदिश राशियाँ

(ii) सदिश राशियाँ

 

(i) अदिश राशियाँ (Scalar quantities)जिन राशियों को पूर्णतः व्यक्त करने के लिए केवल इनका परिमाण (magnitude) पर्याप्त होता है, उन्हें अदिश राशियाँ कहा जाता है।

उदाहरण -द्रव्यमान, ताप, आवेश, विभव, समय, ऊर्जा, विद्युत धारा इत्यादि अदिश राशियों के कुछ उदाहरण हैं।

 

(ii) सदिश राशियाँ (Vector quantities)-जिन भौतिक राशियों को पूर्णतः व्यक्त करने के लिए उनके परिमाण और दिशा दोनों का उल्लेख करना आवश्यक होता है उन्हें सदिश राशियाँ कहा जाता है।

उदाहरण –  विस्थापन, वेग, बल, संवेग इत्यादि सदिश राशियाँ हैं। सदिशों का संयोजन सदिश बीजगणित (vector algebra) के नियमों द्वारा किया जाता है |

 

  • सदिश राशियों का निरूपण (Representation of Vector Quantities)

किसी सदिश को एक रेखाखंड (line segment) द्वारा निरूपित किया जाता है जिसकी लंबाई से सदिश का परिमाण तथा तीर (arrow) चिह्न से उसकी दिशा प्रदर्शित होती है। सदिश राशियाँ अक्षरों के ऊपर तीर का चिह्न लगाकर लिखी जाती हैं। यदि किसी सदिश का परिमाण \vec{V}  हो,  तब उसे \vec{V} से लिखेंगे।  सदिश के परिमाण (magnitude) को उसका मापांक (modulus) भी कहा जाता है |

इसे |\vec{V}| या केवल \vec{V} द्वारा सूचित किया जाता है। सदिश \vec{V} का मापांक | \vec{V}| एक अदिश होता है और इसे \vec{V} का मौड पढ़ा जाता है।

 

  • सदिश राशियों के प्रकार

(a) तुल्य सदिश (Equal vectors)-वैसे सभी समांतर सदिश (parallel vectors) जिनके परिमाण तथा दिशाएँ समान होती हैं, तुल्य सदिश (equal vectors) कहे जाते हैं। उदाहरण के लिए \vec{A} और \vec{B} तुल्य सदिश हैं (\vec{A} = \vec{B}) तथा हे C\vec{C}और \vec{D} भी तुल्य सदिश हैं (\vec{C}= \vec{D})।

(b) विपरीत या ऋणात्मक सदिश (Opposite or negative vector)- यदि दो सदिश एक-दूसरे के समांतर तथा परिमाण में समान हों, परंतु दिशा में एक-दूसरे के विपरीत हों, तो वे विपरीत सदिश कहे जाते हैं। इनमें से प्रत्येक सदिश दूसरे काम ऋणात्मक सदिश है।

(c) शून्य सदिश (Null vector)-शून्य परिमाण के सदिश को शून्य सदिश कहा जाता है तथा इसे \vec{0} से व्यक्त किया जाता है। चूँकि दो सदिशों का योग (sum) भी एक सदिश होता है, अतः दो सदिश \vec{A} तथा \vec{B} का योग भी एक सदिश होगा जिसे शून्य सदिश कहते हैं।

(d) एकांक सदिश (Unit vector)- एकांक परिमाण के सदिश को एकांक सदिश कहा जाता है। एकांक सदिश प्रायः किसी सदिश की दिशा प्रदर्शित करने में प्रयुक्त होता है। यदि किसी सदिश \vec{V} का परिमाण \vec{V} हो, तो \vec{V} की दिशा में एकांक सदिश \hat{V} निम्नांकित प्रकार से परिभाषित होता है |

किसी सदिश \vec{V} के एकांक सदिश को \hat{V} से व्यक्त किया जाता है तथा इसे V carat या V cap या V hat पढ़ा जाता है |

  • सदिशों का योग : (ADDITION OF VECTORS)

दो या दो से अधिक सदिशों का एक परिणामी सदिश ज्ञात करने की प्रक्रिया सदिशों का योग कहलाती है। केवल समान प्रकार के सदिशों का योग किया जा सकता है। उदाहरणतया दो बलों अथवा दो वेगों को जोड़ा जा सकता है। लेकिन एक बल तथा एक वेग को नहीं जोड़ा जा सकता।

 

सदिशों का योग ज्ञात करने की ज्यामितीय विधि (Geometrical Method of Addition of Vectors)

मान लिया कि दो संदिशों \vec{A} और \vec{B} को जोड़ना है। इनका सदिश योग ज्ञात करने के लिए के अनुसार पहले सदिश \vec{A}  (= \vec{OP}) खींचते हैं और फिर \vec{A} के बाणान (arrow-head) पर सदिश \vec{B} (= \vec{PQ}) खींचते हैं। सदिश \vec{A} के प्रारंभिक सिरे और सदिश के बाणान को मिलानेवाले रेखाखंड \vec{OQ} से निरूपित सटिश \vec{R} को \vec{A} एवं \vec{B} का सदिश योग (vector sum) कहा जाता है।

इस प्रकार, \vec{R} = \vec{A}+ \vec{B}. यहाँ \vec{A}+ \vec{B} का परिमाण, सदिश R की लंबाई OQ की नापका ज्ञात किया जाता है। इसकी दिशा सदिश \vec{R} एवं सदिश \vec{A} अथवा \vec{B} के बीच का कोण मापकर व्यक्त की जाती है।

सदिशों के योग का क्रमविनिमेय नियम  साहचर्य नियम (Commutative Law and Associative Law of Sum of Vectors)

– दो या दो से अधिक सदिशों का योग क्रम-विनिमेय नियम (commutative law) तथा साहचर्य नियम (associative law) का पालन करता है जो निम्नांकित चित्रों से स्पष्ट हो जाता है

                                                                       

  • सदिशों का त्रिभुजीय नियम –

यदि दो सदिशों को परिमाण एवं दिशा में किसी त्रिभुज की दो क्रमागत भुजाओं द्वारा दर्शाया जाये तो उनके परिणामी सदिश को त्रिभुज की तीसरी भुजा को विपरीत क्रम में लेकर दर्शाया जाता है। इसे ‘सदिशों का त्रिभुजीय नियम’ कहा जाता है।

  • समानान्तर चतुर्भुज के नियम (Parallelogram law): – अगर किसी पिण्ड का वेग दो दिशाओं में हो जिन्हें किसी समानान्तर चतुर्भुज के पर आसन्न भुजाओं द्वारा निरूपित किया जाता हो तो इसका परिणामी वेग उस समानान्तर चतुर्भुज के उस कर्ण द्वारा दिशा और परिमाण (Magnitude) में निरूपित होता है जहाँ से दो आसन्न भुजाएँ खींची जाती है । इसे ‘सदिशों का समानान्तर चतुर्भुज के नियम कहा जाता है।

 

  • दो सदिशों का अंतर (घटाव) [Difference (subtraction) of Two Vectors]

दो सदिश \vec{A} और \vec{B} के अंतर (difference) का अर्थ होता है \vec{A}\vec{B} अर्थात \vec{A} + (\vec{B})। अतः, दो सदिशों का अंतर एक सदिश में दूसरे सदिश का ऋण सदिश (negative vector) जोड़कर प्राप्त किया जाता है। सदिश \vec{A} से सदिश \vec{B} को घटाने के लिए \vec{A} में \vec{-B} को जोड़ना होगा।             

इसी प्रकार, सदिश \vec{B} से सदिश \vec{A} को घटाने के लिए \vec{B} में \vec{-A} को जोड़ना होगा |                                                                                                 

 

NOTE – सदिश अंतर प्रतिक्रम-विनिमेय है (vector subtraction is anticommutative), अर्थात सदिशों को उलटे क्रम में घटाने पर विपरीत सदिश मिलता है।

 

  • सदिश योग तथा सदिश अंतर की विश्लेषिक विधि (Analytical Method of Vector Addition and Vector Subtraction) –

सदिशों का योग ज्ञात करने की ज्यामितीय विधि  बहुत उपयोगी नहीं है। त्रिविमीय सदिशों (three-dimensional vectors) के लिए तो यह विधि बहुत ही असुविधाजनक है।

अतः, सदिशों का योग अथवा अंतर ज्ञात करने के लिए विश्लेषिक विधि (analytical method) आधक उपयोगी होती है, जो इस प्रकार है

सदिशों का वियोजन (Resolution of vectors) :

किसी सदिश को भिन्न-भिन्न दिशा में तोड़ने की क्रिया को सदिश का वियोजन कहते हैं।

(a) किसी सदिश को दो लम्बवत् दिशाओं में वियोजन : –

माना कि \vec{A} एक सदिश है जिसे भली-भाँति \vec{OC} रेखा से निरूपित किया जाता है। 0 बिन्दु से Ox और OY कारटेशियन नियामक का दो लम्बवत् अक्ष खींचे जाते हैं। सदिश \vec{A} धनात्मक x अक्ष के साथ e कोण बनाता है। \vec{C} बिन्दु (सदिश \vec{A} के सिरे) से OX और OY पर क्रमश: CP और CQ लम्ब डाला जाता है । तब सदिश \vec{A} का अवयव (Component) OX और OY दिशा में क्रमशः OP और PQ हैं । OF को A और OQ को A. के रूप में निरूपित करके अगर उन्हें एकांक सदिश के रूप में व्यक्त किया जाये तो

(b) किसी सदिश का तीन लम्बवत् दिशाओं में वियोजन :

अगर सदिश \vec{A} का प्रत्यालेख (Projection) X, Y और Z दिशा से क्रमशः A.A, और \vec{A} हो                   

और सदिश \vec{A} का परिमाण या मापांक                                                                                                                                             

सदिश \vec{A} और X-अक्ष के बीच के कोण का cos सदिश \vec{A} का x-दिशा कोसाइन (X-direction cosine) कहा जाता है तथा इसे \vec{A} से सूचित (Represent) किया जता है । अतः

जहाँ A सदिश \vec{A} का परिमाण या मापांक है। इसी तरह Y-दिशा कोसाइन                                                                                                                                                                                 

यदि किसी बिन्दु P के नियामक x, y, z हो तो मूल बिन्दु से इसकी दूरी r = OP नीचे जैसे लिखा जाता है ।                                                 

इसे स्थिति सदिश (Position vector) कहते हैं |

 स्थिति सदिश (Position Vector) –

मूलबिंदु के सापेक्ष किसी बिंदु की स्थिति (position) को व्यक्त करने के लिए स्थिति सदिश (position vector) का उपयोग किया जाता है जिसे प्रायः \vec{r} से व्यक्त किया जाता है। द्विविम (two-dimensions) में दो नियामक (x, y) तथा त्रिविम (three-dimensions) में तीन नियामक (x,y,z) ज्ञात रहने पर किसी बिंदु P की स्थिति ज्ञात हो जाती है।

शून्य सदिश तथा इसके गुण (Zero Vector or null vector  and its Properties) –

जिस प्रकार वास्तविक संख्याओं के साथ-साथ शून्य का भी अपना महत्त्व है उसी प्रकार सदिश के अध्ययन में शून्य सदिश (zero vector) की भी एक महत्त्वपूर्ण अभिधारणा (concept) है। ऐसा सदिश जिसका परिमाण परिमाण (Magnitude) शून्य हो, शून्य सदिश कहलाता है । ऐसे सदिश को 0 से निरूपित किया जाता है।

दूसरे शब्दों में इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि सदिश जिसका प्रारम्भिक (Initial) और अन्तिम (Terminal) बिन्दु सन्निपाती (Coincident) हो, शून्य सदिश कहलाता है।

शून्य सदिश का परिमाण शून्य होता है और इसकी कोई विशिष्ट दिशा (Specific direction) नहीं होती है । ऐसा सदिश, जो शून्य सदिश नहीं है, सार्थक सदिश (Proper vector) कहलाता है |                                                                                                                                           

स्थिर पिण्ड (Stationary object) का विस्थापन सदिश शून्य है । इसी तरह समरूप गति से त्वरण का सदिश शून्य सदिश है । इस तरह हम देखते हैं कि शून्य सदिश का एक विशेष महत्त्व है ।

 

सदिशों का गुणन (Multiplication of Vectors) –

सदिश योग के लिए विभिन्न सदिशों का सदिश (similar) होना आवश्यक है, जैसे एक विस्थापन सदिश में दूसरा विस्थापन सदिश जोड़ा जा सकता है, परंतु इसमें अन्य सदिश (जैसे बल, संवेग आटि नहीं जोडे जा सकते हैं। लेकिन गुणन के लिए सदिश का सदिश होना आवश्यक नहीं है। दो भिन्न  प्रकार के सदिशों के गुणनफल से अनेक भौतिक राशियाँ परिभाषित की जाती हैं। सदिश के निम्नांकित प्रकार के गुणनफल संभव होते हैं

  1. सदिश और एक अदिश का गुणनफल = एक सदिश

 

  • एक अदिश से एक सदिश का गुणन (Product ofa Vector byaScalar)

किसी सदिश को एक अदिश से गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल भी एक सदिश ही होता है और इसकी दिशा वही होती है जो मूल सदिश की थी तथा इसका परिमाण दोनों राशियों के परिमाणों के गुणनफल के बराबर होता है। अतः, किसी सदिश \vec{A} का एक अदिश m से गुणनफल एक अन्य सदिश m\vec{A} होगा जिसका परिमाण \vec{A} के परिमाण का m गुना, अर्थात m\vec{A} तथा दिशा A के समांतर समान (same) दिशा में (जब m धनात्मक हो) अथवा विपरीत दिशा में (जब m ऋणात्मक हो) होती है।

 

  1. दो सदिशों का गुणनफल अदिश एवं सदिश दोनों हो सकता है।

(a) यदि दो सदिशों का गुणनफल एक अदिश हो, तो इस प्रकार के गुणनफल को अदिश गुणनफल (scalar product) कहा जाता है। जैसे बल और विस्थापनका गुणनफल, अर्थात कार्य W एक आदेश राशि है।

(b) यदि दो सदिशों का गुणनफल एक सदिश हो, तो वैसे गुणनफल को सदिश गुणनफल (vector product) कहा जाता है। जैसे F और का सदिश गुणनफल, अर्थात बल(torque) एक सदिश है।

 

  • दो सदिशों का अदिश गुणनफल (Scalar Product of Two Vectors)

दो सदिशों का अदिश गुणनफल (scalar product) एक अदिश होता है जिसका मान उन सदिशों के मापांकों (moduli) और उनके बीच के कोण की कोज्या (cosine) के गुणनफल के बराबर होता है। दो सदिश \vec{A} और \vec{B} के अदिश गुणनफल को संकेत \vec{A} . \vec{B} से प्रदर्शित किया जाता है।  इस गुणनफल को बिंदुगुणनफल (dot product) या अदिश गुणनफल (scalar product) या आंतर गुणनफल (inner product) भी कहा जाता है।

इसी प्रकार,

अतः, दो सदिशों का अदिश गुणनफल उनमें एक सदिश के मापांक (modulus) और दुसरे सदिश के मापांक का पहले सदिश की दिशा में प्रक्षेप के गुणनफल (product) के बराबर होता है।

 

अदिश गुणनफल के कुछ गुण (Some Properties of Scalar Product)

(a) दो समांतर सदिशों का अदिश गुणनफल उनके मापांकों के गुणनफल के बराबर होता है।

(b) दो परस्पर लंबवत (orthogonal) सदिशों का अदिश गुणनफल शून्य होता है।                                                                            यदि \vec{A} और \vec{B} के बीच कोण 90° हो, तो                                                                                                   

(c) अदिश गुणनफल क्रम-विनिमेय (commutative) होता है।

(d) अदिश गुणनफल वितरित (distributive) होता है|

(e) किसी सदिश का उसी सदिश से अदिश गुणनफल उस सदिश के मापांक के वर्ग के  बराबर होता है, अर्थात –

इसे.सदिश \vec{A} का स्वतः गुणनफल (self product) कहा जाता है। इस गुण के आधार पर दो सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण ज्ञात किया जा सकता है।

 

दो सदिशों का सदिश गुणनफल (Vector Product of Two Vectors)

दो सदिशों का सदिश गुणनफल (vector product) एक सदिश होता है जिसका मान उन सदिशों के मापांक (moduli) तथा उनके बीच के कोण की ज्या (sine) के गुणनफल के बराबर होता है और दिशा (direction) दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार दोनों सदिशों से गुजरनेवाले समतल के लंबवत होती है।

दो सदिश \vec{A} और \vec{B} के सदिश गुणनफल को संकेत \vec{A} x \vec{B} से प्रदर्शित किया जाता है तथा इसे क्रॉस गुणनफल (cross product) या बाह्य गुणनफल (outer product) भी कहा जाता है।

                         

प्रक्षेप्य गति (Projectile motion) :

जब किसी पिण्ड (Object) को जमीन की सतह से कुछ ऊँचाई पर से क्षैतिज दिशा (जमीन की सतह के समानान्तर) में फेंका जाता है तब उस पिण्ड को प्रक्षेप्य (Projectile) कहते हैं । प्रक्षेप्य जिस पथ पर गतिशील रहता है उस पथ को प्रक्षेप्य-पथ (Trajectory) कहते हैं । इसे चित्र में दिखलाया गया है।

प्रक्षेप्य गति  का उदाहरण निम्नलिखित है

1.चलती रेलगाड़ी की खिड़की से किसी पिण्ड को गिराना ।

2.चलते हुए हवाई जहाज से बम को गिराना ।

3. राइफल से गोली को छोड़ना ।

4. किसी भी दिशा में पत्थर के टुकड़े को फेंकना ।

5. खिलाड़ी (Athlete) द्वारा भाला (Javelin) या हथौड़ा फेंकना ।

6. पानी के टंकी के आधार के समीप वाले छेद से तेज रफ्तार से पानी का निकालना ।

ऊपर के उदाहरणों में हम देखते हैं कि प्रक्षेप्य दो वर्गों के संयुक्त प्रभाव से गतिशील है।

(i) क्षैतिज दिशा में समरूप वेग जबकि हवा का कोई रूकावट नहीं है।

(ii) गुरुत्व के कारण उदग्र दिशा में समान रूप से वेग में परिवर्तन होना । ए. इन दोनों वगों का (जो एक-दूसरे से लम्बवत् दिशा में कार्य करता है) प्रक्षेप्य (Projectile) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रक्षेप्य की गति के बारे में अध्ययन करने के लिए हम मानते हैं कि

(i) हवा के कारण घर्षण प्रतिरोध (Resistance) नहीं है

(ii) पृथ्वी के घुमाव (Rotation of earth) और पृथ्वी की वक्रता (Curvature) के कारण प्रक्षेप्य की गति पर नगण्य (Negligible) प्रभाव पड़ता है।

(iii) प्रक्षेप्य (Projectile) की गति सभी बिन्दुओं पर गुरुत्वीय त्वरण का मान और दिशा अपरिवर्तित रहता है ।

 

प्रक्षेपक के पथ का समीकरण

प्रक्षेप्य द्वारा चले गए पथ की आकृति क्या होती है ? इसके लिए हमें पथ का समीकरण निकालना होगा ।                                                  प्रक्षेपक के पथ का समीकरण –

यह प्रक्षेप्य के पथ का समीकरण है।

इसमें a तथा b नियतांक हैं । यह एक परवलय का समीकरण है, अर्थात् प्रक्षेप्य का पथ परवलयिक होता है ।

                                                                                                                                    प्रक्षेप्य का पथ परवलयाकार होता है

 

अधिकतम ऊँचाई का समय

प्रक्षेप्य अधिकतम ऊँचाई तक पहुँचने के लिए कितना समय लेता है ।

क्योंकि इस बिंदु पर \vec{V} = 0  इसलिए समीकरण tm से हम का मान निकाल सकते

प्रक्षेप्य की उड़ान की अवधि में लगा कुल समय T, हम समीकरण  में y= 0 रखकर निकाल लेते हैं ।

प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई –

समीकरण  में t=1 रखकर प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई h की गणना की जा सकती है ।

प्रक्षेप्य का क्षैतिज परास

प्रारंभिक स्थिति (x=y= 0) से चलकर उस स्थिति तक जब y= 0 हो प्रक्षेप्य द्वारा चली गई दूरी को क्षैतिज परास, R, कहते हैं। क्षैतिज परास उड्डयन काल T में चली गई दूरी है । इसलिए, परास R होगा :

 

समीकरण से स्पष्ट है कि किसी प्रक्षेप्य के वेग ए लिए R अधिकतम तब होगा जब 0 = 45° क्योंकि sin 900 = 1 (जो sin 20 का अधिकतम मान है) ।   इस प्रकार अधिकतम क्षैतिज परास होगा

 

एक समान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) –

जब कोई वस्तु किसी वृत्त की परिधि पर गति करती है तो उसकी गति को वृत्तीय गति कहते हैं। यदि वस्तु किसी वृत्त की परिधि पर इस प्रकार गति करती है कि वह समान समय अन्तरालों में समान दूरी तय करती है, चाहे समय अन्तराल कितने ही छोटे क्यों न हों, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं। अथवा – जब कोई वस्तु एकसमान चाल से किसी वृत्ताकार पथ पर गति करती है तो उसकी गति को एकसमान  वृत्तीय गति कहते हैं। उदाहरण- इस प्रकार की गति के उदाहरण हैं :

1.पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों की अपनी कक्षाओं में सूर्य के चारों ओर गति लगभग एकसमान वृत्तीय गति होती है।

2.किसी मैदान में वृत्ताकार मार्ग पर एकसमान चाल से साइकिल चलाते हुए मनुष्य की गति।

3.रस्सी के एक सिरे पर पत्थर बांधकर जब उसे क्षैतिज वृत्ताकार मार्ग पर नियत चाल से घुमाया जाता है तो पत्थर की गति एकसमान वृत्तीय गति होती है।

4.घूमते हुए बिजली के पंखे के ब्लेड (पंखडी) के एक नोंक की गति …… आदि।

 

कुछ अन्य परिभाषाएं –

आवर्तकाल (Time period) – सम्पूर्ण वृत्त का एक चक्कर लगाने में वस्तु को जितना समय लगता है, उसे उसका आर्वतकाल कहते हैं। इसे प्रायः 7 से व्यक्त करते हैं।

इसका मात्रक सेकण्ड होता है, यह एक अदिश राशि है।

आवृत्ति (Frequency) –

एक सेकण्ड में वस्तु वृत्त के जितने चक्कर लगाती है, उसे उसकी आवृत्ति कहते हैं। इसे प्रायः v (nu), n या f से प्रकट करते हैं।

  • इसका si मात्रक Hz (hertz) रखा गया है।
  • C.G.. में इसका मात्रक प्रति सेकण्ड (s’) होता है।

मान लो वस्तु का आर्वतकाल | है तो वह T सेकण्ड में वृत्त का एक चक्कर लगाएगी, अतः 1 सेकण्ड में वह 1/T चक्कर लगाएगी। अतः आवृत्ति v =1/T अथवा VT =1 कोणीय (Angular Displacement) – किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करते हुए कण द्वारा किसी निश्चित समय-अन्तराल में तय किए गए कोण को उसका कोणीय विस्थापन कहते हैं।

मान लो वृत्तीय मार्ग पर गति करते हुए कण की किसी समय । पर स्थिति A पर है, At समय बाद कण बिन्दु B पर पहुंच जाता है तो समय-अन्तराल At में कण का कोणीय विस्थापन = LAOB = A0  अतः त्रिज्य सदिश (radius vector) 0A द्वारा तय किया गया कोण ही कोणीय विस्थापन है, कण की नयी स्थिति में OA , OB बन गया है।

कोणीय विस्थापन का मात्रक रेडियन होता है जो कि कोण का मात्रक है।

रेखीय विस्थापन की तरह कोणीय विस्थापन भी एक सदिश राशि है, यदि वामावर्ती (anticlockwise) दिशा में कण घूम रहा है तो उसकी दिशा वृत्त तल के लम्बवत ऊपर की ओर, अन्यथा नीचे की ओर होती है।

कोणीय वेग (Angular Velocity) – समय के साथ कोणीय विस्थापन के परिवर्तन की दर को कोणीय वेग कहते हैं।

यदि At समय में कण का कोणीय विस्थापन Ae है तो उसका औसत कोणीय वेग –

अतः तात्क्षणिक कोणीय वेग

यदि कण की वृत्तीय गति का आर्वतकाल | है तो कण एक चक्कर में 27 रेडियन का कोण तय करता है।

समय जहां कण की आवृत्ति । है। सूत्र w = 2mv के आधार पर  को कोणीय आवृत्ति भी कहते हैं। कोणीय वेग एक सदिश राशि है यदि वस्तु वामावर्त दिशा में वृत्तीय गति कर रही है तो कोणीय वेग के की दिशा वृत्त के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर और दक्षिणावर्त गति में नीचे की ओर होती है। घड़ी की सुइयों के घूमने की दिशा को दक्षिणावर्त और उसके विपरीत दिशा को वामावर्त कहते हैं।

वास्तव में, w की दिशा घूर्णन अक्ष के अनुदिश होती है, यह घूर्णन वृत्त के केन्द्र से होकर गुजरती है, और उसके तल के लम्बवत् होती है। कोणीय वेग का मात्रक रेडियन प्रति सेकण्ड, अर्थात् रेडियन सेकण्ड1 (rad s-‘) होता है। कोणीय वेग की विमाएं M°LT-1 होती है।

 

कोणीय त्वरण (Angular Acceleration) – समय के साथ कोणीय वेग के परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण कहते हैं। इसे प्रायः a द्वारा प्रकट करते हैं।

कोणीय वेग में परिवर्तन कोणीय त्वरण= कोणीय वेग में परिवर्तन / समय अन्तराल

यदि समय अन्तराल AT → 0 तो कोणीय त्वरण तात्क्षाणिक होता है।

अतः किसी क्षण पर कोणीय त्वरण

कोणीय त्वरण भी एक सदिश राशि है जिसकी दिशा कोणीय वेग – परिवर्तन की दिशा होती है। इसका si मात्रक रेडियन सेकण्ड होता है।

 

अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force):

किसी पिण्ड के तात्क्षणिक वेग के लम्बवत दिशा में गतिपथ के केन्द्र की ओर लगने वाला बल अभिकेन्द्रीय बल (Centripetal force) कहलाता है। अभिकेन्द्र बल के कारण पिण्ड वक्र-पथ पर गति

करती है (न कि रैखिक पथ पर)।

वृत्तीय गति का कारण अभिकेन्द्रीय बल ही है। माना कि एक कण एक समान चाल v से । त्रिज्या वाले एक वृताकार पथ जिसका केंद्र ० हो में घूम  रहा है। इस वृताकार मार्ग के किसी भी बिन्दु पर कण के रेखीय वेग की दिशा उस बिन्दु पर खींची गई,

वृत की स्पर्श रेखा की दिशा में होती है. माना कण समय At में बिन्दु P से P तक AS दूरी तय करता है।

माना \vec{V1} तथा \vec{V2} क्रमश: बिन्दु P तथा P, पर कण का वेग है। \vec{V1} तथा \vec{V2}, प्रत्येक का  परिमाण \vec{V}, परंतु दिशाएँ अलग-अलग है। .

P, से P2 तक जाने में वेग में परिवर्तन –

और \vec{V2} को बिन्द् Q से खींचा जाए तथा तीसरा सदिश \vec{V} यदि   के शीर्ष से \vec{V2} के शीर्ष तक खींचा जाए तो यह तीसरा सदिश वेग में परिवर्तन को दर्शाता है।

अभिकेंद्रिय बल के उदाहरण –

(i) एक गोलाकार पथ में घूमते हए एक धागे के अंत में बंधे पत्थर के मामले में, अभिकेन्द्रीय बल धागे

में तनाव द्वारा प्रदान किया जाता है

(ii) जब कोई कार सड़क पर टर्न लेती है, तो टायर और सड़क के बीच घर्षण बल अभिकेन्द्रीय बल

प्रदान करता है।

(ii) सूर्य या चन्द्रमा के चक्कर लगाने वाले ग्रहों के मामले में पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हुए, उनके बीच गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा अभिकेन्द्रीय बल प्रदान किया जाता है

(iii) एक इलेक्ट्रॉन के लिए एक गोल पथ में नाभिक के चक्कर लगाने के लिए, इलेक्ट्रॉन और नाभिक

के बीच इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण बल आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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